Shivpal became Mulayam and Mainpuri remained intact 2022 शिवपाल हुए मुलायम तो मैनपुरी रही कायम 2022

Shivpal became Mulayam and Mainpuri remained intact 2022 उपचुनाव में जहां सपा अपना गढ़ मैनपुरी बचाने में कामयाब रही तो रामपुर से उसे हाथ धोना पड़ा। जबकि खतौली में रालोद अपना दमखम दिखाने में कामयाब रहा। आजमगढ़ के बाद वह रामपुर में भाजपा दूसरी बार सेंध लगाने में कामयाब रही। जबकि भाजपा अपनी खतौली सीट नहीं बचा सकी लेकिन उसकी भरपाई उसने रामपुर की सीट जीतकर कर पूरी कर ली। सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद रिक्त हुई

मैनपुरी सीट पर अखिलेश यादव की
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पत्नी डिंपल यादव उम्मीदवार थी उनके मुकाबले भाजपा ने पूर्व सांसद व मुलायम के करीबी रहे रघुराज शाक्य को उम्मीदवार बनाया था। परंपरागत मैनपुरी सीट बचाने के लिए सपा नेतृत्व कितना गंभीर था इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि नामांकन के बाद से ही अखिलेश यादव इटावा-मैनपुरी में ही कैंप किए रहे। डिंपल की बड़ी जीत के दो बड़े कारण रहे पहला तो यह कि वहां सहानुभूति लहर ने काम किया दूसरा प्रसपा प्रमुख शिवपाल यादव ने एकजुटता का शक्ति प्रदर्शन करते हुए डिंपल को जिताने के लिए अपनादमखम लगा दिया था। सैफई कुनबे की एकजुटता का प्रदर्शन भी डिंपल की बड़ी जीत का कारण बना। मैनपुरी उपचुनाव में डिंपल की जीत घोषित होते ही

शिवपाल यादव ने अपनी प्रसपा पार्टी के Shivpal became Mulayam and Mainpuri remained intact 2022

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सपा में विलय की घोषणा कर दी। इसी साल हुए विधानसभा चुनाव में शिवपाल सपा गठबंधन का हिस्सा थे बाद में वे गठबंधन से अलग हुए लेकिन मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद वे फिर साईकिल पर सवार हुए और डिंपल को भारी जीत दिलाकर अपने व्यापाक जनाधार होने का सबूत दे दिया । १९९६ से लेकर अब जितने भी मैनपुरी संसदीय सीट पर चुनाव और उपचुनाव हुए उस पर सैफई कुनबे का ही कब्जा रहा ।

डिंपल से पहले इसी सीट से शिवपाल हुए… Shivpal became Mulayam and Mainpuri remained intact 2022

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उपचुनाव में धर्मेन्द्र यादव और तेजप्रताप यादव भी जीत चुके है। इस बार भी इन्हीं दोनों को उम्मीद थी कि उन्हे ही लड़ाया जायेगा लेकिन अखिलेश ने डिंपल को ही चुनाव मैदान में उतार दिया। डिंपल २०१९ के लोकसभा चुनाव में कन्नौज से हारी थी। डिंपल की हारजीत के पीछे सपा प्रमुख अखिलेश यादव अपनी सियासत विरासत और बचाने के साथ ही कुनबे की लाज बचाने की महारत दिखाने में सफल रहे। मैनपुरी सीट निकलने के साथ ही खतौली सीट भी सपा रालोद गठबंधन की झोली में आई।

खतौली सीट बचाने में विफल रही, रालोद ने जीत दर्ज कराई Shivpal became Mulayam and Mainpuri remained intact 2022

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यह सीट भाजपा के विक्रम सैनी की सदस्यता समाप्त होने के बाद रिक्त हुई थी इस सीट से रालोद ने पूर्व विधायक मदन भैया को अपना उम्मीदवार बनाया था जबकि भाजपा ने यहां से विक्रम सैनी की पत्नी राजकुमारी को मैदान में उतारा था। इस सीट को भाजपा से छीनकर रालोद गठबंधन ने विधानसभा में अपनी संख्या अब नौ कर ली है। सपा नेतृत्व ने यह सीट रालोद के लिए ही छोड़ रखी थी। हालांकि विधानसभा के आम चुनाव में भाजपा ने किसान आंदोलन के बावजूद बेहतर प्रदर्शन किया था

लेकिन उपचुनाव में भाजपा को डबल इंजन सरकार की खूबियां गिनाने का भी कोई लाभ नहीं मिला।

रामपुर में आजम को जमीन दिखाने में कामयाब रहे आकाश Shivpal became Mulayam and Mainpuri remained intact 2022

रामपुर लोकसभा के बाद विधानसभा सीट छीनकर भाजपा ने सपा के इस अभेददुर्घ में सेंध लगा दी है। लोकसभा सीट छीनने के बाद इसी सीट पर हुए उपचुनाव में भी भाजपा ने प्रत्याशी ने ही अपनी जीत दर्ज कराई। आजम खां की सदस्यता रद्द होने के बाद हुए उपचुनाव में सपा उम्मीदवार आसिम रजा को भाजपा के आकाश सक्सेना ने शिकस्त दी। इसी सीट साल हुए चुनाव में सपा के आजम खां ने आकाश सक्सेना को ५५ हजार वोटों से शिकस्त दी थी। में उन्हे शिकस्त सपा उम्मीदवार को शिकस्त देकर आकश सक्सेना ने अपना बदला ले लिया।

रामपुर में भाजपा से दूसरी बार मिला सपा को जोर का झटका Shivpal became Mulayam and Mainpuri remained intact 2022

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सपा के हारे आसिम रजा इसी हाल हुए लोकसभा उवचुनाव में भी उम्मीदवार थे तब भी उन्हे भाजपा से शिकस्त मिली थी। उपचुनाव में भाजपा के | निर्वाचित आकाश सक्सेना २०१७ में भाजपा उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़े लेकिन उन्हे शिकस्त का सामना करना पड़ा था। पूर्व मंत्री शिवबहादुर सक्सेना के पुत्र आकाश सक्सेना ने ही रामपुर में आजम खां के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ी। जिसके चलते आजम खां को न सिर्फ पत्नी और बेटे के साथ जेल जाना पड़ा बल्कि आखिर में विधायकी तक गंवानी पड़ी।Shivpal became Mulayam and Mainpuri remained intact 2022

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