गुरु पूर्णिमा पर हुए कार्यक्रम, उमा प्रेम आश्रम पर प्रवचन के बाद प्रसाद वितरण

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 गुरु पूर्णिमा पर हुए कार्यक्रम, उमा प्रेम आश्रम पर प्रवचन के बाद प्रसाद वितरण

पब्लिक लाइव मीडिया संवाददाता औरया: गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर जनपद में श्रद्धापूर्वक मनाया गया। कोविड गाइडलाइन का अनुपालन करते हुए अखंड पाठ, हवन, प्रसाद वितरण आदि कार्यक्रम आयोजित किए गए। भक्तों ने एक पौधा की पोषित करने का संकल्प लेकर पौधारोपण भी किया। उमा प्रेम आश्रम फफुंद रोड पर पूरे दिन सत्संग चलता रहा। अंत में भक्तों ने भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया।

आचार्य Manoj अवस्थी जी ने Nari सशक्तीकरण पर जोर देते हुए कहा कि वर्तमान में Nari में शिक्षा के साथ संस्कार भी बहुत जरूरी है। सती अनुसुइया Charitra का वर्णन करते हुए कहा कि पतिव्रता Nari में इतनी सामर्थ्य होती है, वह देवताओं को भी पालने में झुला सकती है। वह

मनोजवन् आश्रम

उमा प्रेम आश्रम पर प्रवचन करते आचार्य मनोज अवस्वी सभ्यता व संस्कार को भी जन्म देती

है। भारतीय नारी सब से ही पूजनीय रही है। सती चरित्र की कथा सुनाते हुए कहा कि कभी किसी के यहाँ बिना बुलाए नहीं जाना चाहिए। बेटी अपने पिता से बहुत प्रेम करती है और पिता भी अपनी बेटी को बहुत प्रेम करता है। भाग्यवान के यहां बेटी का जन्म होता है। हमें हमेशा देवी स्वरूप कन्या का पूजन करना चाहिए। भ्रूण हत्या महापाप है। पिता

गुरु पूर्णिमा पर पौधा रोपित कर लिया संरक्षण का संकल्प पूर्णिमा के पावन अवसर पर शनिवार को आवास विकास कालोनी स्थित पार्को व सार्वजनिक मार्गों पर पौधा रोपित कर सुरक्षा के लिए दी गार्ड भी लगाए पाकर, कटहल अशोक, चितवन, बोतलधाम, हरसिंगार, गुड्डल आदि के पौधा लगाए गए। समिति

पब्लिक लाइव मीडिया संवाददाता, औरेयाः एक

विचित्र पहल सेवा समिति के सदस्यों ने गुरु पूर्णिमा पर आवास विकास के पार्कों में लोगों के साथ पौधारोपित कर इनके संरक्षण व पोषण का भी संकल्प दिलाया। लोगों ने अपने घरों के सामने पार्क में गुरु दक्षिणा के रूप में एक-

एक पौवा रोपित किया। संस्था की और से शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में जीवनधारा पौधारोपण अभियान निरतर चलाया जा रहा है। धार्मिक स्थलों, कालेज, पार्को व सार्वजनिक स्थानों पर आवसीजन देने वाले पौधा रोपित किए जाते हैं। गुरु

के धैर्य व माता की ममता को कभी मापा नहीं जा सकता। गुरु की कृपा से ही परमात्मा की भक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। ध्रुव को नारद जी जैसे गुरु मिले और उन्हें भगवान की

के संस्थापक आनंद नाथ गुप्ता, ख. योगेश विश्नोई, डा. एसएस परिहार, तेज बहादुर वर्मा, राकेश गुप्ता, रानू पोरवाल, डा. अभय कात अग्रवाल, छ्या त्रिपाठी, हरमिंदर सिंह कोहली आदि पर्यावरण प्रेमी मौजूद रहे।

भक्ति व दर्शन दोनों प्राप्त हो गए। भगवान की कृपा से ही संत व गुरु का मिलन होता है। विभिन्न प्रदेशों के शिष्य गुरु पूर्णिमा पर आयोजित कार्यक्रम में सम्मिलित हुए।

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